समय-समय पर लें पौष्टिक आहार, मधुमेह पर लगेगा लगाम , जिला अस्पताल में आयोजित हुई दो दिवसीय निदान और गर्भकालीन मधुमेह मेलेटेस का प्रबंधन पर प्रशिक्षण , न्यूट्रीशन थेरैपी और व्यायाम के साथ- साथ चिकित्सा पोषण की दी जानकारी

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सिद्धार्थनगर। जिला अस्पताल में आयोजित दो दिवसीय निदान और गर्भकालीन मधुमेह मेलेटेस का प्रबंधन विषय पर शुक्रवार को स्टॉफ नर्स व एएनएम को प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें ट्रेनर ने बताया कि मधुमेह से पीड़ित गर्भवती को समय- समय पर पौष्टिक आहार देने से बीमारी पर लगाम लगाया जा सकता है। मधुमेह से पीड़ित गर्भवती को न्यूट्रीशन थेरैपी व व्यायाम के साथ चिकित्सा पोषण की जानकारी देती रहें। ट्रेनर डीपीएम राजेश शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार ने गर्भवती महिलाओं को बीमारी से संबंधित जानकारी व निदान के लिए एनएमएम व स्टाफ नर्स को ट्रेनिंग देकर जागरूक कर रही है, ताकि क्षेत्र में जाने पर बीमारी से संबंधित लोगों को जागरूक कर सकें। उन्होंने बताया कि मधुमेह से पीड़ित गर्भवती महिलाएं गर्भकाल के समय थोड़ी सतर्कता बरतते हुए भरपूर मात्रा में पौष्टिक आहार लें तो सेहत बेहतर रहेगा। साथ ही बीमारी पर लगाम लगाया जा सकता है। महिला परामर्शदाता प्रमोद कुमार संत ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान जिन महिलाओं को मधुमेह संबंधी बीमारी हो जाती है वह मेडिकल न्यूट्रीशन थेरैपी व व्यायाम हर दिन करती रहें। साथ ही पोषण के लिए भरपूर मात्रा में पौष्टिक आहार लें तो मधुमेह बीमारी पर नकेल कसा जा सकता है। एसीएमओ (आरसीएच) डॉ. सौरभ चतुर्वेदी ने मधुमेह से ग्रसित महिला के भ्रूण में पल रहे नवजात को मधुमेह से बचाव व प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। दो दिवसीय प्रशिक्षण में जोगिया बर्डपुर, इटवा, शोहरतगढ़, खेसरहा, भनवापुर, लोटन व बांसी क्षेत्र की एएनएम व स्टाफ नर्स ने हिस्सा लिया। जिसमें पम्मी सागर, श्रृंखला, रूबी, सोनम, कुसुमलता, शारदा देवी, आकांक्षा वर्मा मौजूद रही। मधुमेह से पीड़ित गर्भवती महिलाएं आहार श्रृंखला के तहत 24सौ कैलोरी ऊर्जा के लिए सुबह के नास्ते में सब्जी, चपाती, दही, रायता भरपूर मात्रा में लें, जबकि दोपहर के भोजन में चपाती, चावल, चिकनकरी व हरी सब्जियों का भरपूर मात्रा में सेवन करें। पौष्टिक आहार के समय- समय पर सेवन से बीमारी पर काफी हद तक कम किया जा सकता है। एसीएमओ (आरसीएच) डॉ. सौरभ चतुर्वेदी ने प्रशिक्षण में बताया कि क्षेत्र में कार्य करते समय या अस्पताल में आने वाली हर गर्भवती महिला की मधुमेह की जांच की जाए। इस दौरान अगर किसी महिला में मधुमेह की जानकारी होती है तो उसे पौष्टिक आहार लेने की जानकारी, व्यायाम, पेड़ में पल रहे बच्चे से बीमारी के बचाव की जानकारी दे कर लोगों को जागरूक करें।

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