कोरोने से बचाव में बेसिक शिक्षा विभाग बन सकता है संकट मोचन….माननीय मुख्यमन्त्री एवं बेसिक शिक्षा मन्त्री जी को अध्यापक अनिल त्रिपाठी ने भेजा सुझाव, यदि ऐसा होगा तो लोगो को काफी राहत मिलेगी

आज देश संकट की घडी में है। हम सबको एकजुट होकर,घर में रह कर,सावधानी पूर्वक सबकी मदद करनी है। उत्तर प्रदेश की अधिकांश जनसंख्या गांवों में निवास करती है। गांवों के लोग रोजी रोटी कमाने *बाहर गये थे* और अब वह किसी ना किसी माध्यम से घर आ रहे हैं और स्वास्थ विभाग द्वारा उनका *स्क्रीनिंग* हो रहा है। ऐसे में बहुत सारे लोगों को चिकित्सक *15 दिन आईसोलेसन* करने की सलाह दे रहे हैं किन्तु गरीब होने के कारण उन उन गरीबों के पास *सीमित मकान* अर्थात एक कमरा,बरामदा ही हैं। ऐसे परिवार व पडोस के लोगों में भी संक्रमण फैलने का खतरा है। मेरी माननीय मुख्यमन्त्री एवं बेसिक शिक्षा मन्त्री जी विनती है कि आप ऐसे लोगों को आईसोलेसन/प्राथमिक उपचार करने के लिए *प्राथमिक विद्यालय,उच्च प्राथमिक विद्यालय,आंगनबाडी केन्द्र,ग्राम सचिवालय,मकतब,मदरसा,इण्टर कालेज,डिग्री कालेज या उस गांव में जो भी शैक्षणिक संस्थान* उपलब्ध है,उनका दरवाजा खुलवा कर एक-एक कमरा *आईसोलेशन* करने के लिए उपलब्ध करा सकते हैं। जिससे वह व्यक्ति आसानी से *आईसोलेशन* कर अपना व दुसरों का जीवन बचा सकते है। यह संस्थान प्राय: गांव के बाहर ही है। यहां पर लोगों का अाने जाने से भी रोका जा सकता है।

*यहां पर क्या मिल सकती है सुविधाएं….*

*1-* सोशल डिस्टेन्स
*2-* ग्राम प्रधान,कोटेदार एवं रसोईयों द्वारा भोजन
*3-* आराम करने के लिए पृथक-पृथक कमरे
*4-* शौचालय,पेयजल,नल
*5-* पंखा,बिजली
*6-* नियमित उपचार

*किसकी लगाये यहां पर ड्यूटी…..*

*1-* सुरक्षा हेतु गांव के चौकीदार की।
*2-* भोजन हेतु ग्राम प्रधान,कोटेदार एवं रसोईयों की।
*3-* सफाई हेतु सफाईकर्मी की
*4-* चिकित्सा सुविधाओं हेतु ऐनम,आशा की।
*5-* उच्चाधिकारियों को सूचना देने के लिए आंगनबाडी की।

मेरा विश्वास है कि सरकार अगर मेरे इस सुझाव को मूर्त रूप दे तो कोरोना की लडाई में बेसिक शिक्षा विभाग भी खुद को धन्य समझेगा।

आपका

*अनिल कुमार त्रिपाठी*

*शमसुद्दीन अहमद*

उप्रप्राशिसंघ,खुनियांव,सिद्धार्थनगर।

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