नेपाल में वाल्मीकि जयंती एवं शरद पूर्णिमा के अवसर पर नारायणी गंडकी माता की 54वीं महाआरती कार्यक्रम का आयोजन

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पूजा गुप्ता

कपिलवस्तु/सिद्धार्थनगर। भारत नेपाल सीमा पर स्थित शिवाला घाट त्रिवेणी धाम नेपाल में वाल्मीकि जयंती एवं शरद पूर्णिमा के अवसर पर नारायणी गंडकी माता की 54वीं महाआरती कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुक्तिनाथ धाम नेपाल के पीठाधीश्वर श्री लोक आनंद स्वामी जी महाराज, कोटी होम आश्रम त्रिवेणी धाम नेपाल के पीठाधीश्वर धर्मपाल गुरु वशिष्ट जी महाराज, भारत से आये मुख्य अतिथि बालक दास बाबा जी महाराज, नेपाल से आये मुख्य अतिथि मेख़ बहादुर सापकोटा, मिठू सापकोटा, रेशम बुदामगर, शक्ति सापकोटा, उत्तर प्रदेश से आये शिक्षाविद राधेश्याम पांडे, भाजयुमो के दुर्गा प्रसाद गुप्त, कार्यक्रम के संस्थापक डी आनंद एवं गायक प्रभात रंजन ने संयुक्त रुप से दीप प्रज्वलित करके किया। श्री लोक आनंद महाराज ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि शरद पूर्णिमा और वाल्मीकि जयंती के पावन मौके पर त्रिवेणी संगम तट पर महाआरती कार्यक्रम में शामिल होने से जीवन सफल हो जाता है। भारत से आये श्री बालक दास ने आदिकवि महर्षि वाल्मीकि की जीवनी को सहजता के साथ प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि श्री मेख बहादुर ने महाआरती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस सदानीरा की महिमा गंगा से बढ़कर है। संत गुरु वशिष्ठ ने गौ रक्षा और गौ सेवा पर केंद्रित प्रवचन दिया। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय काठमांडू एवं बुटवल नेपाल से आई बहनों ने कार्यक्रम के संस्थापक डी आनंद की भूरी भूरी प्रशंसा की। स्वरांजलि सेवा संस्थान की गायिका आशा साहू, कुमारी बबीता, कुमारी संगीता एवं शिवचंद्र शर्मा ने समवेत स्वर में देवी पचरा प्रस्तुत किया। सुर आंगन संगीत के कलाकार गायक प्रभात रंजन, गायिका सपना शर्मा, संदीप सम्राट एवं राजन रॉक ने भक्तिमय प्रस्तुति करके भक्तों का मन मोह लिया। गायक एवं समाजसेवी संगीत आनंद ने हिंदी भजन द्वारा महर्षि वाल्मीकि को भगवान के रूप में प्रस्तुत किया। भारत नेपाल से आये भक्तगण इस दिव्य महाआरती कार्यक्रम से घंटों लाभान्वित होते रहे। नेपाल के गायक निर्मल अमात्य और पार्श्व गायक राम श्रेष्ठ के नेपाली भजनों पर देर तक तालियां बजती रही। शिक्षाविद श्री राधेश्याम पांडे ने 9 नवंबर को उत्तर प्रदेश में आयोजित होने वाले वार्षिक कार्यक्रम हनुमान महोत्सव हेतु नेपाल के भक्तों को आमंत्रित करते हुए कहा कि त्रिवेणी धाम एक पुण्यभूमि है और यहां के भक्तों में विशिष्ट आध्यात्मिक झलक मिलती है। मंच संचालन डी आनंद ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सत्यदेव पांडे ने किया। इस मौके पर संगीत निर्देशक केदारनाथ पांडेय, काठमांडू के सुनील कुमार खत्री , अशोक कुमार थापा, संजीव खड़का, अजय भक्त,शिक्षक भैरव प्रसाद शर्मा, श्री जीवन मुक्तानंद सरस्वती, अखिलेश शाह, स्वरांजलि सेवा संस्थान की राष्ट्रीय अध्यक्षा अंजली आनंद, विजय केसरी ,संगीता देवी, गोरख प्रसाद विश्वकर्मा, अंजू कुमारी आदि उपस्थित थीं। नारायणी गंडकी माता की जय घोष से संपूर्ण वातावरण गुंजायमान रहा। इस दौरान विशिष्ट प्रतिभाशाली व्यक्तित्व नारायणी गंडकी सम्मान से सम्मानित किये गये। इस मौके पर कई श्रद्धालु भक्तों को धार्मिक साहित्य एवं रुद्राक्ष भेंट किया गया। कार्यक्रम स्थल पर देर रात तक भक्त झूमते रहे। ढोल नगाड़ा मृदंग घंटी की मधुर ध्वनि के बीच नारायणी गंडकी माता की 54वीं महाआरती की गयी।

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