इटवा छेत्र मे फर्जी ग्राहक सेवा केन्द्रों की भरमार , बगैर बैंक की अनुमति के आधार से पैसा निकाल रहे , आए दिन ग्राहको के खाते से पैसा गायब होने की बात आ रही सामने , जाँच व कार्यवाही के आभाव मे बढ़ रही इस तरह के कृत्य

इटवा , सिद्धार्थनगर । इटवा थानाक्षेत्र के विभिन्न चौराहों के प्राईवेट दुकानों पर बिना बैंक की अनुमती के संचालित कथित ग्राहक सेवा केन्द्रों के संचालकों की मनमानी से बैंक ग्राहक त्रस्त हैं। इस तरह के दुकानदार ग्राम प्रधान आदि के सहमति से मोबाइल लेकर ग्राम प्रधानों के घर पैसा निकालते है । जिनके पास ना तो रजिस्टर होता है और ना ही जमा निकासी का विवरण । कई बार लोगो का पैसा निकल जाने के बाद भी खाते मे पैसा नही आया है बोल कर ग्राहक को वापस कर दिया जाता है । इस तरह की शिकायत आम होने के बाद भी ग्राहको की सुनने वाला कोई नही है । छेत्र के ग्राम सुहिया निवासी सूफ्फ्ल के का सिंडिकेट बैंक मे एकाउंट है । सूफ्फ्ल के मुताबिक उसने संग्रामपुर चौराहे पर एक प्राईवेट दुकान जो आधार से पैसा निकालते है उनके यहा से पैसा चेक कराते समय एकाउंट से 2000 रुपए गायब हो गया । बैंक से पास बुक छपाया तब पता चला । लेकिन उसका पैसा नही मिला । यह एक दिन का वाक्या नही है थानाक्षेत्र के संग्रामपुर , सेमरी , पिपरा , झकहिया , कठेला आदि स्थान पर बोर्ड बैनर लगा कर आधार से पैसा निकालने के साथ धोखाधड़ी भी कर रहे है । कई बार तो खाताधारकों के एकाउंट से अतिरिक्त पैसा काट लेने का भी मामला प्रकाश मे आया । कई बार संचालक उपभोक्ताओं से धन निकासी के संबंध में दो-दो बार अंगूठा लगवाकर मांग से अधिक धन निकाल ले रहे हैं।अभी कुछ बैंक उपभोक्ताओं ने ढ़ेबरुआ थाने में तहरीर देकर सीएससी संचालक के खिलाफ धांधली कर अधिक धन निकालने का आरोप लगाया है। पूर्व मे इटवा मे तैनात तहसीलदार राजेश अग्रवाल जो की इस समय शोहरतगढ़ मे तैनात है उन्होने अपने समय मे इटवा छेत्र मे इस तरह से संचालित कई अवैध दुकानों पर छापामारी भी की थी । उस समय कई अवैध दुकानदार जो इस तरह का काम करते है उन्हौने अपना बैनर बोर्ड हटा दिया था । कई दुकानों को तत्कालीन तहसीलदार ने जवाबदेही हेतु नोटिस भी भेजा था । उस समय सिर्फ बैंको से अधिकृत ग्राहक सेवा केंद्र पर ही पैसा का लेनदेन होने लगा था । लेकिन तहसीलदार राजेश अग्रवाल के तबादले के बाद एक बार फिर इस तरह के दुकानदरो ने बैनर व पोस्टर लगकर लोगो को गुमराह करने के साथ ही कई लोगो ने धोखाधड़ी करना शुरू कर दिया है । ग्रामीण खाताधारक असली व नकली ग्राहक सेवा केन्द्रों की पहचान नही कर पा रहे है । बस उनका काम जंहा से हो जाए वही सुलभ समझते है और कई बार अज्ञानता के कारण धोखाधड़ी का शिकार हो रहे है । क्या है ग्राहक सेवा केंद्र संचालन के नियम और कैसे मिलाता है ग्राहक सेवा केंद्र का लाईसेन्स :—-ग्राहक सेवा केंद्र के लाईसेन्स के लिए अभ्यर्थी को कम से कम इंटर मीडियट होना चाहिए , साथ ही संचालक का कोई क्रिमिनल रिकार्ड ना हो इसके लिए पुलिस बेरी फिकेसन व पुलिस अधिछक द्वारा जारी करेक्टर सर्टिफिकेट होना चाहिए । इसके अलावा सीकोरटी धनराशि जमा करना होता है तब संचालन का परमीशन मिलता है । उसके बाद 5 प्रकार के रजिस्टर होते होते है जिनमे खाता खोलने के साथ ही जमा व निकासी का रिकार्ड रखना होता है जिसकी समय समय पर संबधित बैक से अधिकारियों द्वारा विजिट कर निगरानी की जाती है । लेकिन वही प्राईवेट दुकानदार प्राईवेट पोर्टल के जरिए पैसा निकालने का काम कर रहे जो किसी प्रकार की योग्यता भी नही रखते है । और ना ही कोई रजिस्टर । जिससे गांव के खाता धारक गुमराह होने के साथ ठगी का शिकार हो रहे है ।
इस तरह के दुकानदारो व लोगो को गुमराह करने वालो कर प्रशासन की नजर कब परेगी यह एक अहम सवाल है । लोगो ने जिलाधिकारी से ऐसे दुकानदारो के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है । जो बिना किसी बैंक की अनुमति के आधार से पैसा निकालने का काम कर रहे है ।

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