कथित बैंक के नाम से हो रहा इटवा कस्बा में चल रहा गोरखधंधा

 

डा0 जंगबहादुर चैधरी


  • कभी भी ठगी का शिकार हो सकते हैं जमाकर्ता



इटवा, सिद्धार्थनगर। स्थानीय कस्बे में दिनों कई लोग बैंक की माफिक पास बुक बनाकर ग्राहको से जमा करने के नाम पैसा पर धन कलेक्षन कर रहे। इतना ही नहीं उपभोक्ताओं को कम समय में जमा धन दुगुना करने का भी झांसा दे रहे है। पूर्व में कई संस्थाओं द्वारा पैसा जमा करा कर फरार होने के बाद आज तक भले ही उनका पैसा वापस न हुआ हो। लेकिन इटवा कस्बे में एक बार फिर अनैतिक ढंग से पैसा जमा कराने का यह कारोबार तेजी से फलफूल रहा है। 

पर स्थानीय प्रशासन व खुफिया विभाग की इन कथित बैंकर्स पर नजर नहीं पड़ रही है। बताया जाता है कि इटवा कस्बे में कुछ लोग कम समय में पैसा दुगुना करने का झांसा देकर पान की गुमटी वालों रिक्षा चालकों के अलावा किराना ब्यवसाइयों को कथित रुप से भारत सरकार से मान्यता प्राप्त होने व पास बुक बनाकर डेली 50 से सौ रुपया जमा कर कम अवधि में दुगुना करने के नाम पर लोगो से पैसा कलेक्शन रहें हैं। यदि जल्द ही इस फर्जीवाड़े पर अंकुष नहीं लगा तो काफी संख्या में लोग ठगी का षिकार हो सकते है। बताया जाता है इस कार्य कई ऐसे लोग भी सामिल है जो विभिन्न नेटवर्किंग कम्पनी व कथित बैंक के नाम से डेली हजारो रुपया दुकानदारो से जमा करने के नाम पर कलेक्षन कर रहे है। जब कि इटवा कस्बे में कई वर्ष इस तरह के एजेन्टों के पास लोगो का हजारो रुपया जमा था। और अचानक आफिस बंद होने से ठगी का षिकार हो गये। बावजूद एक बार फिर इस तरह का कारोबार इटवा कस्बे में तेजी से फल फूल रहा है। कस्बे के कुछ बुद्धि जीबियों का कहना है कि कुछ लोग पास बुक बनाकर दुकान दुकान लोगों से पैसा जमा करने के नाम पर एजेन्ट रखकर दुकानो से डेली कलेक्षन करा रहे है। बुद्धिजीवियों का कहना है कि ऐसे कृत्यों पर खुफिया विभाग व स्थानीय पुलिस एवं प्रषासन को नजर रखना चाहिये। नहीं तो भविष्स में भारी संख्या में लोग ठगी का षिकार हो सकते है।

इस संबंध में पुलिस क्षेत्राधिकारी इटवा दीपनरायन त्रिपाठी का कहना है कि इस तरह कि शिकायत उन्हें नहीं मिली है शिकायत मिलने पर जांच की जायेगी।

सरकारी क्रय केन्द्रों पर नहीं शुरू हुआ धान खरीद , किसान परेषान

डा0 जंगबहादुर चैधरी

इटवा , सिद्धार्थनगर। स्थानीय क्षेत्र में सरकारी क्रयकेन्द्रों पर धान की खरीद शुरु नहीं हो रही है। नतीजन क्षेत्रीय किसानो को खाद बीज आदि के लिये पैसो की आवष्यकता के चलते प्राइवेट दुकानों पर मजबूर होकर धान बेचना पड़ रहा है। जिससे किसानांे को उनके उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। विभागीय जिम्मेदारों की उदासीता के कारण इटवा तहसील क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर बनाये गये सरकारी क्रय केन्द्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। स्थानीय किसानो नेें जिलाधिकारी से क्रय केन्द्रो पर अबिलम्ब खरीद प्रकृया षुरु किये जाने की मांग की है।



क्षेत्र में किसानो के खेत में धान कटाई का काम तेजी से चल रहा है। और गेहू सरसो , मटर आदि की बुवाई की तैयारियां भी जोरो से है। जिसको लेकर पैसो की जरुरत के चलते क्षेत्रीय किसान विभिन्न चैराहो पर लगे प्राइवेट दुकानो पर अपना धान बिक्री कर रहे है। औने पौने दामो पर बिक्री के चलते उन्हे काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। केन्द्रों के कुशल संचालन व मानीटरिंग में ंलगाये गये जिम्मेदार केन्द्रा की जांच के बजाय बचाव करते नजर आ रहे है। भारतीय किसान यूनियन के इटवा तहसील अध्यक्ष राकेष कुमार श्रीवास्तव , किसान अब्दुल रहीम, राम सबद मौर्य आदि का कहना है कि सपा सरकार अपने आप को किसानो का हितैसी होने का दावा करती है। लेकिन किसानों का धान तक सरकारी केन्द्रो पर खरीद कराने में असफल साबित हो रही है। जब कि किसानो के लिये उनकी एक मात्र पूजीं व फसल ही है। जिससे उनके परिवार का खर्च चलने के साथ साथ मूलभूत आवष्यकताओं की पूर्ति होती है। राकेष श्रीवास्तव ने कहा कि यदि जल्द ही क्रय केन्द्रो पर खरीद चालू नहीं किया गया तो संगठन के तरफ से किसानो की समस्याओं के लिये आवाज बुलंद की जायेगी। इस संबंध में उपजिलाधिकारी इटवा जुबेर बेग ने कहा कि इस मामले में जिलाधिकारी का भी कड़ा निर्देष है । यदि खरीद केन्द्रो पर लापरवाही मिली तो कठोर कार्यवाही की जायेगी।

 

खुनियाव ।    गंदगी से बजबजा रही नालिया,बीमारी फैलने की आंशंका

आरिफ

ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत में सफाई कर्मी की तैनाती की मांग की
खुनियांव विकास क्षेत्र के ग्राम पंचायत रेहरा भैसाही की स्थिती 

इटवा। खुनियांव विकास क्षेत्र के ग्राम रेहरा उर्फ भैसाही में सड़क पर नालियां गंदगी से पटी हुई है।कीचड़ व उसके सड़न से निकल रहे दुर्गन्ध से लोगो का रहना मुहाल हो रहा है। ग्रामीणों ने एडीओं पंचायत से गांव में सफाई कर्मी की तैनाती की मांग की है। 
गावों के दर्जनों ग्रामीणों का कहना है कि गांव की नालियां बजबजा रही है। कारण यहां सफाई कर्मी की तैनाती नहीं है। जिससे साफ सफाई नहीं हो पा रही है। और इस गंदगी से बीमारी फैलने का भी भय बना रहता है। बतौर ग्रामीण अरशद अहमद, पप्पू चौधरी ,मैराज मुस्तफा, कनिकराम , हदिसुल्लाह आदि ने एडीओं पंचायत से गांव में सफाई कर्मी के तैनाती की मांग की है। इस बावत एडीओं पंचायत खुनियांव रवि कुमार का कहना है कि सफाई कर्मियों की संख्या कम होने के कारण रोस्टर के अनुसार सफाई की ब्यवस्था की गयी है जिसमें टोली बना कर कई सफाई कर्मी एक साथ गांव की सफाई कर रहे है। यदि जांच में गांव में गंदगी मिली तो ड्यूटी में लगे सफाई कर्मियों के खिलाफ कार्यवाही की जायेगी।

इटवा । ​दलालों के चुम्बल में है राशन कार्ड 

जटा शंकर सोनी


इटवा। सिद्धार्थनगर। विकास खण्ड खुनियाव के ग्राम पंचायत करही में इन दिनों दलालों की दलाली सर चढ़ कर बोल रहा है । यहां एक ताजा मामला सरकार की महत्वाकांक्षी योजना गरीबो के राशन कार्ड में भी दलालों ने पैसे लेकर राशन कार्ड बनाने का मामला सामने आया है । ग्राम प्रधान ने अरोप लगाते हुये कहा कि गांव के कुछ लोग दलाली कर लोगो को बहला फुसला कर राशन कार्ड में नाम फीड कराने के नाम पर 500से 1000रूपया का वसुली करते है ।इस तरह गांव नसीम, मुज्जममलि , आरती, नसीम, आदि एैसे कई लोग इन दलालों की शिकार हुये है । इस सम्बन्ध मे इटवा उपा जिलाधिकारी जूबेर बेग का कहना है कि ऐसी कोई जानकारी नही है अगर कोई शिकायत मिलती है तो जांच कर कार्यवाही करेगें। 

​इटवा में पिट्रोल लेने वाले हो जायें सावधान । ” कैसे होती है पम्प पर पेट्रोल डालते समय घटतौली ?

डा० जंगबहादुर चौधरी

इटवा,सिद्धार्थनगर । पूर्वांचल क्रान्ति  रिपोर्टर को कुछ  दिनों से पेट्रोल पम्पों द्वारा कम पेट्रोल डाले जाने की सूचनाएं मिल रही थी। लेकिन ये बात समझ में नहीं आ पा रही थी की जब मीटर चलता है तो ये पेट्रोल पंप वाले कम पेट्रोल कैसे डाल देते हैं। इसी उधेड़बुन को लेकर पूर्वांचल क्रान्ति  रिपोर्टर टीम इसके जानकारी के लिये इटवा कस्बे के एक पेट्रोल पम्प पर पेट्रोल डलवाने गये जहां से ये शिकायते आ रही थी। 

 

रिपोर्ट के मुताबिक

 जब वह पेट्रोल पम्प पर पहुंचे तब उससे पहले दो और लोग पेट्रोल डलवा रहे थे इसीलिए और वह भी अपनी बाइक लाइन में लगा दी और गौर से कर्मचारियों के पेट्रोल डालने का निरीक्षण करने लगा। मारुती स्विफ्ट वाला पेट्रोल डलवा रहा था, उसने एक हज़ार रुपए का नोट गाड़ी के अन्दर से ही कर्मचारी को दिया चूँकि काफी भीड़ थी इसीलिए चालक ने बाहर आना उचित नही समझा । कर्मचारी ने पहले मीटर शून्य किया फिर उसमें हजार रुपए फीड किये और नोदल लेकर पेट्रोल डालने लगा । इस समय बतौर  रिपोर्टर यह सोचने में व्यस्त था की जब मीटर में हजार रुपए फीड कर दिए गये हैं ।  तो निसंदेह हजार का ही पेट्रोल निकलेगा।  फिर मैंने सोचा अगर मीटर में कुछ गड़बड़ नही है तो फिर आखिर ये लोग कैसे लोगों को बेवकूफ बनाकर कम पेट्रोल डाल देते हैं? हो सकता है मुझे झूठी शिकायत मिली हो । 

बस यही सोचते-सोचते मेरे सीधा ध्यान नोजल पर था तभी मुझे अचानक से कर्मचारी के हाथ में कुछ हरकत महसूस हुई उसने इतने धीरे से हाथ हिलाया की पास खड़े शख्स को भी संदेह न हो पाए लगभग 20 या 30 सेकेंड के बाद फिर उसने वही हरकत दोबारा की।  अब मुझे दाल में कुछ काला लगा कि आखिर इसने दो बार हाथ में हरकत क्यूं की जबकि नोजल का स्विच एक बार दबा देने पर स्वत: पेट्रोल टंकी में गिरने लगता है। इतने में स्विफ्ट में 1000 Rs का पेट्रोल डालने के बाद उसने मुझसे आगे वाली बाइक में 100 का पेट्रोल डालना शुरू कर दिया। उसने वही क्रिया फिर दोहराई पहले मीटर को शून्य किया फिर नोजल टंकी में डालकर पेट्रोल डालने लगा लेकिन अचानक से उसने हाथ में फिर हरकत की लेकिन इस बार की हरकत 20 या 30 सैकिंड की न होकर 8 से10 सेकेंड की थी। अब मुझे समझ में आ गया हो न हो इसके नोजल में ही कुछ गड़बड़ है। 

खैर उसके बाद मेरा नम्बर भी आ गया मैंने 200 रुपए देकर पेट्रोल डालने को कहा उसने फिर मीटर जीरो किया और नोजल डालकर पेट्रोल डालने लगा। इस बार मेरा पूरा ध्यान कर्मचारी की उंगलियों पर था। अभी नोजल डाले कुछ ही सेकेंड बीते होंगे की उसने उंगलियों में कुछ हरकत की लेकिन मै पहले से ही तैयार था तो उसके हरकत करते ही मैंने उसका हाथ पकड़कर नोजल बाहर खींच लिया। इस हरकत से कर्मचारी घबरा गया और मेरी बाइक भी लड़खड़ा गयी लेकिन ये क्या नोजल से तो पेट्रोल आ ही नही रहा था। 

होता कुछ यूँ है की जिस नोजल से कर्मचारी पेट्रोल डालते हैं उसका सम्बन्ध मीटर से होता है अगर मीटर में 200 रुपए का पेट्रोल फीड किया गया है तो एक बार नोजल का स्विच दबाने पर स्वतः 200 रुपए का पेट्रोल डल जायेगा उसे ऑफ करने की कोई जरूरत नहीं है। स्विच सिर्फ मीटर को ऑन करने के लिए होता है उसका ऑफ से कोई सम्बन्ध नहीं होता क्योंकि मीटर फीड की हुई वैल्यू खत्म होने पर रुक जाता है अगर पेट्रोल डालते समय नोज़ल का स्विच बंद कर दिया जाये तो मीटर चलता रहता है। लेकिन नोजल बंद होने की वजह से पेट्रोल बाहर नहीं निकलता। इसी बात का फायदा उठाकर कर्मचारी करते ये हैं कि जब भी कोई पेट्रोल डलवाता है तो बीच-बीच में स्विच-ऑफ कर देते हैं जिससे रुक-रुक कर पेट्रोल टंकी में जाता है और हम कंपनी को कम माईलेज की गाड़ी कहकर कोसकर चुप हो जाते हैं। 

फर्ज कीजिये आप पेट्रोल पम्प पर गये और 200 रुपए का पेट्रोल डलवाया 200 रुपए का पेट्रोल डलने में 30-45 सेकंड का समय लगता है आपका सारा ध्यान मीटर की रीडिंग पढ़ने में निकल जाता है। और अगर ये लोग 10 सेकंड के लिए भी स्विच ऑफ करते हैं तो समझ लीजिये आपका 50 रुपए का पेट्रोल कम डाला गया है। 

कृपया सभी लोग आगे से जब भी पेट्रोल लेने जाएं और आपके साथ भी ऐसा कुछ हो तो इसका कड़ा विरोध कर पम्प के बाहर लिखे नम्बर पर कंपनी के अधिकारियों को सूचित कर कम्पलेन दर्ज कराये ताकि घट तौली पर अंकुश लग सके। 

​गुमटियो पर बिक रही है पेट्रोल । सुविधा शुल्क के खेल में नही हो रही कार्यवाही 

डा०जंगबहादुर चौधरी

इटवा, सिद्धार्थनगर। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के सख्त  निर्देश  के बाद भी खुलेआम फुटपाथ की दुकानों पर बेचे जा रहें पेट्रोल आदि ज्वलनशील पदार्थो की बिक्री पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। जिम्मेदारों की लचर कार्यप्राणाली के चलते स्थानीय क्षेत्र के विभिन्न मार्गों पर फुटपाथ व पान की गुमटियों में केरोसिन व पेट्रोल की बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है। जिससे हल्की सी चूक से कभी भी बड़ी घटना हो सकती है। विदित हो कि 27 फरवरी 2002 में हुये गोधरा काण्ड के बाद माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने पूरे देश में ज्वलनशील पदार्थ प्लास्टिक बोतल व डिब्बे में बेचे जाने पर रोक लगा दी थी। लेकिन पंप मालिकों को  अपने फायदे के आगे  नियमों की कोई परवाह नहीं है। बतौर क्षेत्रवासियों में राजू गुप्ता , मंजूर आलम , मोहम्मद मेंहताब, संजीत चौधरी आदि ने दुकानो पर पेट्रोल की बिक्री करने वालों पर कार्यवाही की मांग की है। लोगों का कहना है कि घटनाओं की परवाह किये बगैर ऐसे दुकानदार अपनी कमाई के लिये खुलेआम दुकान के सामने डिब्बे में पेट्रोल रखकर ग्राहको को बेच रहे हैं। कई स्थानो पर तो पेट्रोल में मिलावट किये जाने का भी आरोप है।