हंता वायरस से बचाने में कारगर है होम्योपैथी-डा.भास्कर शर्मा

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अगर कोई इंसान चूहों के मल-मूत्र या लार को छूने के बाद अपने चेहरे पर हाथ लगाता है तो हंता संक्रमित होने की आशंका बढ़ जाती है गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड धारी सहित सैकड़ों पुस्तकों के लेखक तथा सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय वा राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त सिद्धार्थनगर के होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ भास्कर शर्मा ने हंता वायरस के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि आमतौर पर हंता वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं जाता हैlहंता के संक्रमण का पता लगने में एक से आठ हफ्तों का वक़्त लग सकता हैl
अगर कोई व्यक्ति हंता संक्रमित है तो उसे बुखार, दर्द, सर्दी, बदन दर्द, उल्टी जैसी दिक़्क़तें हो सकती हैंl
हंता संक्रमित व्यक्ति की हालत बिगड़ने पर फेफड़ों में पानी भरने और सांस लेने में तकलीफ़ भी हो सकती हैl
कोरोना वायरस की तरह हंता वायरस इंसान से इंसान में नहीं फैलता। डॉक्टर भास्कर शर्मा कहते हैं कि अगर कोई व्‍यक्ति चूहों के मल-मूत्र या उनके बिल की चीजें वगैरह छूने के बाद अपनी आंख, नाक और मुंह को छूता है तो उसमें हंता वायरस का संक्रमण फैल सकता है। कोरोना वायरस की तरह हंता वायरस हवा में नहीं फैलता है। डॉ भास्कर शर्मा ने आगे यह भी बताया कि होम्योपैथी की कैंफर 30 की औषधि दिन में तीन बार 3 दिन तक लगातार दिया जाए तो हंता वायरस से बचाव की एक बेहतर औषधि हैl

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